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1991 के अधूरे सुधार भारत के औद्योगीकरण में विफल रहे: विशेषज्ञ
भारत के आर्थिक सुधार कार्यक्रम की कमियों को रेखांकित करते हुए विश्लेषकों का मानना है कि जनसांख्यिकीय लाभ का उपयोग करने और मध्यम आय के जाल से बचने के लिए गहन सुधार आवश्यक हैं।
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भारत के आर्थिक सुधार की यात्रा में मौजूद कमजोरियों को लेकर विशेषज्ञों ने आशंका व्यक्त की है। 1991 में शुरू किए गए आर्थिक उदारीकरण कार्यक्रम के बावजूद देश का औद्योगीकरण पर्याप्त गति से आगे नहीं बढ़ सका है, जिससे दीर्घकालीन विकास की संभावनाएं प्रभावित हुई हैं।
विश्लेषकों के अनुसार, तीन दशक पहले लागू किए गए सुधार कार्यक्रम में संरचनात्मक खामियां रही हैं। ये अधूरे सुधार भारत की विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत करने में विफल रहे हैं, जो रोजगार सृजन और टिकाऊ आर्थिक वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है।
भारत की युवा जनसंख्या इसके लिए एक महत्वपूर्ण संपत्ति है, लेकिन इस जनसांख्यिकीय लाभांश का उपयोग करने के लिए मजबूत औद्योगिक आधार और बेहतर कौशल विकास कार्यक्रमों की आवश्यकता है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि गहन सुधार के बिना भारत मध्यम आय के जाल में फंस सकता है।
इस परिस्थिति से बाहर निकलने के लिए नीति निर्धारकों को विनिर्माण क्षेत्र को पुनर्जीवित करने, बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाने और मानव पूंजी विकास पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। व्यापक आर्थिक सुधार ही देश के दीर्घकालीन समृद्धि का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।