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25 स्थानांतरणों के बाद IAS अधिकारी का संदेश: बच्चों को IAS नहीं बनने दें

भारतीय प्रशासनिक सेवा के एक अनुभवी अधिकारी ने अपने लंबे कैरियर के दौरान 25 बार स्थानांतरण झेलने के बाद अपने बच्चों को सिविल सेवा में न जाने की सलाह दी है। इस कदम से सरकारी कर्मचारियों की चलायमान नियुक्तियों संबंधी दीर्घकालिक मुद्दे पर प्रकाश पड़ता है।

LSN India · 23 October 2026

25 स्थानांतरणों के बाद IAS अधिकारी का संदेश: बच्चों को IAS नहीं बनने दें

भारतीय प्रशासनिक सेवा के एक वरिष्ठ अधिकारी तुकाराम मुंढे ने अपने 25 स्थानांतरणों के अनुभव के बाद एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। अपने दशकों लंबे कैरियर में बार-बार पदस्थापन बदलने के कारण उन्होंने कहा है कि वह अपने बच्चों को IAS सेवा में शामिल होने की अनुमति नहीं देंगे।

मुंढे का यह वक्तव्य भारतीय प्रशासनिक ढांचे के भीतर एक गंभीर समस्या की ओर इशारा करता है। सरकारी अधिकारियों के बार-बार स्थानांतरण से न केवल उनके व्यक्तिगत और पारिवारिक जीवन प्रभावित होते हैं, बल्कि प्रशासनिक निरंतरता भी बाधित होती है।

इस प्रकार के अनुभवों से यह समझ मिलती है कि भारत की सिविल सेवा में कार्यरत अधिकारियों को काम करने की परिस्थितियों में व्यापक सुधार की आवश्यकता है। बार-बार स्थानांतरण की नीति से कैरियर की स्थिरता और परिवार कल्याण दोनों ही प्रभावित होते हैं।

भविष्य की पीढ़ी को सरकारी सेवा में आकर्षित करने के लिए इन तरह की मूलभूत समस्याओं के समाधान की आवश्यकता है, जिससे योग्य और समर्पित अधिकारी इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में अपना योगदान जारी रख सकें।