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भारत में 8.7 करोड़ लोग शिक्षा और रोजगार से बाहर: नीति आयोग
नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार देश में 8.7 करोड़ लोग न तो पढ़ाई कर रहे हैं और न ही काम करना चाहते हैं। इसमें 88 प्रतिशत लोग घरेलू कामकाज से जुड़े हुए हैं।
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देश की नीति निर्माण संस्था नीति आयोग ने एक चिंताजनक आंकड़ा सामने रखा है। भारत में लगभग 8.7 करोड़ लोग किसी भी तरह की शिक्षा, रोजगार या प्रशिक्षण कार्यक्रम में नहीं जुड़े हुए हैं। यह आंकड़ा देश की श्रम शक्ति में एक महत्वपूर्ण अंतराल को दर्शाता है।
नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, इस गैर-कार्यरत जनसंख्या का लगभग 88 प्रतिशत हिस्सा घरेलू कामकाज में लगा हुआ है। इसका अर्थ यह है कि लगभग 7.6 करोड़ लोग घर के काम-काज को संभालने में अपना समय लगा रहे हैं। यह आंकड़ा समाज में लिंग भेद और असमान जिम्मेदारी का संकेत देता है।
यह स्थिति भारत की मानव संसाधन क्षमता का सही उपयोग न होने का प्रमाण है। शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार सृजन के माध्यम से इस विशाल जनसंख्या को उत्पादक कार्यबल में बदलना देश के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। सरकार के विभिन्न कार्यक्रमों को इसी दिशा में और प्रभावी होने की आवश्यकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू कामकाज में लगे लोगों, विशेषकर महिलाओं को उचित प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता प्रदान करके आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। इससे न केवल व्यक्तिगत आय में वृद्धि होगी, बल्कि राष्ट्रीय आर्थिक विकास में भी योगदान मिलेगा।