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नोटबंदी के दस साल बाद भी नकदी का चलन बरकरार, डिजिटल भुगतान के साथ साथ
दशक भर पहले की गई नोटबंदी के बाद भी भारत में नकदी का संचलन दोगुना हो गया है। यूपीआई लेनदेन में तेजी के बावजूद भारतीय अपनी नकद भुगतान की आदतों को नहीं छोड़ रहे हैं।
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नोटबंदी के दस वर्षों के बाद भी भारत में नकदी का चलन न केवल जारी है, बल्कि उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। परिसंचारी मुद्रा (करेंसी इन सर्कुलेशन) के आंकड़े दर्शाते हैं कि बाजार में मौजूद नकदी की राशि पिछले दस सालों में दोगुनी हो गई है।
यह प्रवृत्ति भारत में डिजिटल भुगतान क्रांति के बढ़ते प्रभाव के साथ एक दिलचस्प विरोधाभास प्रस्तुत करती है। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के माध्यम से लेनदेन पिछले कुछ वर्षों में अभूतपूर्व स्तर तक पहुंचा है, जिससे भारत को डिजिटल भुगतान में एक वैश्विक नेता के रूप में स्थापित किया गया है।
विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रवृत्ति का अर्थ यह है कि भारतीय उपभोक्ता डिजिटल और नकद दोनों भुगतान साधनों को समानांतर रूप से अपना रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल बुनियादी ढांचे की सीमाएं, अनौपचारिक अर्थव्यवस्था का विस्तार, और बुजुर्गों समेत जनसंख्या के हिस्सों में नकद पसंद नकदी की निरंतर मांग को कायम रखते हैं।
इस वास्तविकता ने भारत की अर्थव्यवस्था की द्वैध प्रकृति को उजागर किया है, जहां आधुनिक डिजिटल भुगतान तंत्र और परंपरागत नकद आधारित लेनदेन एक साथ सह-अस्तित्व में हैं। नीति निर्माताओं और वित्तीय संस्थानों के लिए यह स्वीकार करना महत्वपूर्ण है कि डिजिटल समाधान और नकद सुविधा दोनों ही लंबे समय तक अर्थव्यवस्था का भाग बने रहेंगे।