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रामायण विवाद पर ए.आर. रहमान का जवाब, स्टीव जॉब्स का हवाला दिया
संगीतकार ए.आर. रहमान ने रामायण प्रोजेक्ट को लेकर हुई आलोचना पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि संगीतात्मक रचनाएं पकवानों की तरह होती हैं जिन्हें सराहे जाने से पहले समय की जरूरत होती है।
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प्रसिद्ध संगीतकार ए.आर. रहमान ने अपनी रामायण परियोजना को लेकर मिली आलोचनाओं का जवाब देते हुए कहा है कि कला को समझने के लिए धैर्य जरूरी है। रहमान ने अपनी रचनाओं की तुलना अचार से करते हुए कहा कि कुछ धुनें श्रोताओं द्वारा सराहे जाने से पहले परिपक्व होने का समय चाहती हैं।
संगीत जगत के इस दिग्गज ने टेक उद्योगी स्टीव जॉब्स का हवाला देते हुए कहा कि यदि किसी को उनकी रचना पसंद नहीं आती है तो वह कहीं और अपना ध्यान लगा सकता है। इस टिप्पणी के माध्यम से रहमान ने स्पष्ट किया कि वह आलोचना से परे अपने काम पर ध्यान केंद्रित करना पसंद करते हैं।
रहमान का यह बयान उस समय आया है जब उनकी रामायण प्रोजेक्ट को लेकर सोशल मीडिया पर व्यापक बहस चल रही थी। संगीतकार का मानना है कि हर रचना का अपना समय और स्वीकृति का चक्र होता है।
इंडस्ट्री विशेषज्ञों के अनुसार, रहमान की इस प्रतिक्रिया से साफ है कि वह अपनी कलात्मक स्वतंत्रता पर किसी भी तरह के प्रतिबंध को स्वीकार नहीं करते। उन्होंने अतीत में भी कई मौकों पर कहा है कि संगीत एक व्यक्तिगत यात्रा है और प्रत्येक श्रोता के लिए भिन्न हो सकती है।