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देरी से मिले फ्लैट की चाबी स्वीकार करने से ब्याज का दावा नहीं मिटता: हाईकोर्ट
उच्च न्यायालय ने निर्माता द्वारा देरी से फ्लैट सौंपे जाने पर क्रेताओं को ब्याज का दावा करने का अधिकार दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 'जीरो पीरियड' पहली चूक को मिटा नहीं सकता।
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हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि रियल एस्टेट प्रोजेक्ट में देरी से फ्लैट की चाबी स्वीकार करने का मतलब यह नहीं है कि खरीदार पहले की अवधि के लिए ब्याज का दावा नहीं कर सकते। अदालत के अनुसार, निर्माताओं द्वारा निर्धारित 'जीरो पीरियड' संपत्ति के कब्जे में आई देरी से पहले की जिम्मेदारी को समाप्त नहीं करता।
यह निर्णय उन मामलों में महत्वपूर्ण है जहां बिल्डर्स कब्जे की तारीख में विलंब करते हैं लेकिन बाद में 'जीरो पीरियड' के नाम पर पूर्व की देरी को अनदेखा करने का प्रयास करते हैं। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि मकान खरीदारों का अधिकार कि वे सहमत समय पर संपत्ति का कब्जा लें, कानूनी रूप से संरक्षित है।
अदालत के इस रुख से संपत्ति विवादों में खरीदारों को मजबूत कानूनी आधार मिल गया है। विलंब से होने वाली आर्थिक क्षति के लिए ब्याज दावे का अधिकार बरकरार रहता है, भले ही वे बाद में फ्लैट की चाबी स्वीकार कर लें।