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चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन के लिए घर छोड़ते समय माँ रोई: अभिजीत दिपके
सड़कों पर उतरने वाले प्रदर्शनकारियों के परिवारों की चिंताओं को लेकर अभिजीत दिपके ने कहा कि उनकी माँ के आँसू सभी सक्रियतावादियों के घरवालों की बेचैनी को दर्शाते हैं।
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चुनाव आयोग के विरुद्ध सड़कों पर उतरने वाले प्रदर्शनकारियों के परिवारों की चिंता व्यक्त करते हुए अभिजीत दिपके ने कहा कि घर से निकलते समय उनकी माँ इस तरह रोई जैसे वह किसी युद्ध क्षेत्र की ओर जा रहे हों।
दिपके ने बताया कि उनकी माँ की प्रतिक्रिया केवल व्यक्तिगत चिंता नहीं बल्कि उन सभी परिवारों की व्यापक बेचैनी को दर्शाती है जिनके सदस्य सामाजिक सक्रियता में भाग ले रहे हैं। सड़कों पर उतरने वाले नागरिकों के घर के लोग अक्सर उनकी सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता महसूस करते हैं।
प्रदर्शनकारियों के परिवारों की इस भावनात्मक स्थिति को समझना महत्वपूर्ण है, जो सामाजिक आंदोलनों के एक अदृश्य पहलू को उजागर करता है। जब युवा और सचेत नागरिक अपनी आवाज उठाने के लिए सड़कों पर आते हैं, तो उनके प्रियजन घर पर बैठकर उनकी सुरक्षा की कामना करते हैं।
दिपके का यह कथन दर्शाता है कि राजनीतिक सक्रियता और सामाजिक सेवा केवल व्यक्तिगत मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव पूरे परिवार पर पड़ता है। ऐसे में परिवारों की भावनात्मक जरूरतों को भी समझना और स्वीकार करना जरूरी है।