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शहरी रोजगार गारंटी योजना के लिए कर्मचारी कल्याण निधि का इस्तेमाल करें: कार्यकर्ता
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने शहरी क्षेत्रों में रोजगार सुनिश्चित करने के लिए मौजूदा कर्मचारी कल्याण निधि का उपयोग करने की मांग की है। यह योजना ग्रामीण इलाकों में लागू महात्मा गांधी नरेगा जैसी है।
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देश के विभिन्न शहरों में सक्रिय नागरिक समूह और श्रमिक संगठन एक व्यापक शहरी रोजगार गारंटी योजना की स्थापना का आह्वान कर रहे हैं। कार्यकर्ताओं का मानना है कि इस योजना को वित्तपोषित करने के लिए कर्मचारी कल्याण और पुनर्विकास बोर्ड की मौजूदा निधि का लाभकारी उपयोग किया जा सकता है।
प्रस्तावित योजना का मॉडल ग्रामीण क्षेत्रों में सफल रहे महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम पर आधारित है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि शहरी गरीबों को भी समान रोजगार सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता प्रदान की जानी चाहिए।
इस पहल के समर्थकों ने तर्क दिया है कि शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी और अल्परोजगार की समस्या गंभीर है, खासकर अकुशल और अर्धकुशल श्रमिकों के बीच। वे मानते हैं कि केंद्रीकृत निधि का सही उपयोग करके सरकार हजारों शहरी परिवारों को आजीविका प्रदान कर सकती है और आर्थिक असमानता को कम कर सकती है।
इस मुद्दे पर सरकारी प्रतिक्रिया अभी तक स्पष्ट नहीं है। हालांकि, कार्यकर्ता समूहों ने सभी हितधारकों से इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया है।