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झुग्गी निवासियों के मुद्दों को चुनाव एजेंडे में शीर्ष प्राथमिकता दें: कार्यकर्ता
नागरिक संगठनों का आह्वान है कि नगर निगम चुनावों में झुग्गी बस्तियों में रहने वाली आबादी की समस्याओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार, राजनीतिक दलों को अपने चुनाव कार्यक्रमों में इन वंचित समुदायों के मुद्दों को केंद्रीय स्थान देना चाहिए।
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नगरीय प्रशासन के आसन्न चुनावों को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता और नागरिक समूह सक्रिय हो गए हैं। उनका मानना है कि शहरी झुग्गी बस्तियों में रहने वाली लाखों आबादी के मुद्दों को इस चुनाव में केंद्रीय विषय बनाया जाना चाहिए।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि झुग्गी निवासियों को बुनियादी सुविधाओं जैसे स्वच्छ जल, बिजली, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा की पहुंच में गंभीर कमियां हैं। ये समस्याएं दशकों से अनसुलझी बनी हुई हैं और राजनेताओं की नीतियों में पर्याप्त प्रतिबिंबित नहीं होती हैं।
सामाजिक संगठनों का तर्क है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में समाज के सबसे कमजोर वर्गों की आवाज को सुना जाना चाहिए। उनके अनुसार, चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों को झुग्गी बस्तियों में जन सुनवाई आयोजित करनी चाहिए।
इस प्रश्न पर जब तक ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक शहरी गरीबी की समस्या बनी रहेगी, यह भी कार्यकर्ताओं का दावा है। वे आशा व्यक्त करते हैं कि आने वाले चुनाव में प्रत्याशी अपने चुनावी घोषणापत्र में झुग्गी निवासियों के विकास को लेकर ठोस प्रतिबद्धताएं प्रदान करेंगे।