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नियमगिरि की खदानें फिर से खोलने की योजना पर सक्रियतावादियों की चेतावनी
वेदांता समूह के अध्यक्ष अनिल अगरवाल ने ओडिशा के नियमगिरि में बॉक्साइट खनन को पुनः शुरू करने का सुझाव दिया है, जिससे स्थानीय आदिवासी समुदाय को रोजगार मिलेगा। हालांकि, पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने इस कदम के खिलाफ चेतावनी दी है।
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ओडिशा के नियमगिरि पहाड़ियों में बॉक्साइट खनन को दोबारा शुरू करने की संभावना को लेकर पर्यावरण सक्रियतावादियों ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। वेदांता समूह के अध्यक्ष अनिल अगरवाल ने हाल ही में यह बयान दिया कि इस क्षेत्र में खनन कार्यों को पुनः शुरू किया जाना चाहिए, जिससे स्थानीय जनजातीय आबादी के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
हालांकि, पर्यावरण संरक्षण के पक्षधरों का मानना है कि इस परियोजना से पारिस्थितिक नुकसान का खतरा है। नियमगिरि क्षेत्र जैविक विविधता से समृद्ध है और यहां की खनन गतिविधियों से स्थानीय वन और जल संसाधनों को नुकसान हो सकता है।
यह मुद्दा लंबे समय से विवादास्पद रहा है। स्थानीय आदिवासी समुदाय के अधिकारों और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना एक जटिल चुनौती बनी हुई है। सरकार को इस परियोजना की व्यवहार्यता और दीर्घकालिक प्रभावों का विस्तृत आकलन करना होगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि खनन से उत्पन्न अल्पकालीन लाभ के मुकाबले इसके दीर्घकालिक पारिस्थितिक परिणाम अधिक गंभीर हो सकते हैं। इसलिए किसी भी निर्णय से पहले सभी हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श आवश्यक है।