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राममप्पा मंदिर के पास खुली खदान से विरासत को खतरा, कार्यकर्ताओं का विरोध
तेलंगाना के विश्व धरोहर स्थल राममप्पा मंदिर के निकट खुली खदान परियोजना को लेकर सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं ने आपत्ति जताई है। वे चिंतित हैं कि कोयला खनन से यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त इस प्राचीन मंदिर परिसर को नुकसान पहुंच सकता है।
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राममप्पा मंदिर के संरक्षण से जुड़े विभिन्न संगठनों ने खुली खदान के माध्यम से कोयला खनन की योजना के खिलाफ आवाज उठाई है। ये कार्यकर्ता मानते हैं कि इस परियोजना से न केवल मंदिर की संरचनात्मक अखंडता को खतरा है, बल्कि इससे इस पावन स्थल के आसपास का पूरा पारिस्थितिक तंत्र प्रभावित हो सकता है।
राममप्पा मंदिर, जो काकतीय काल की वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूना माना जाता है, को 2021 में यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया था। यह तेलंगाना के पलमपेट क्षेत्र में स्थित है और भारतीय सांस्कृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है।
विरोध करने वालों का तर्क है कि खनन गतिविधियों से होने वाले कंपन, प्रदूषण और भूजल प्रदूषण ऐतिहासिक महत्व के इस स्थल को स्थायी नुकसान पहुंचा सकते हैं। वे सरकार से इस परियोजना पर पुनर्विचार करने का आह्वान कर रहे हैं।
इस मुद्दे पर अभी तक सरकारी पक्ष की कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, पर्यावरण और सांस्कृतिक संरक्षण को लेकर ऐसे विवाद देश में विकास और विरासत संरक्षण के बीच चल रही बहस को फिर से जागृत करते हैं।