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राष्ट्रगान को लेकर विवाद: मुकेश खन्ना ने वंदे मातरम की वकालत की
अभिनेता मुकेश खन्ना ने वंदे मातरम को राष्ट्रगान बनाने का सुझाव दिया है, जिससे जन गण मन के बारे में एक पुरानी बहस फिर से शुरू हो गई है। उनके बयान ने राष्ट्रगान की उत्पत्ति और महत्व को लेकर सवाल उठाए हैं।
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अभिनेता मुकेष खन्ना ने सुझाव दिया है कि भारत के वर्तमान राष्ट्रगान जन गण मन की जगह वंदे मातरम को राष्ट्रगान घोषित किया जाना चाहिए। उनके इस बयान से भारतीय राष्ट्रगान की पहचान और महत्व को लेकर एक पुरानी बहस फिर से सामने आ गई है।
जन गण मन को 1950 में भारत के संविधान द्वारा आधिकारिक राष्ट्रगान के रूप में अपनाया गया था। यह गीत रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा लिखा गया था। दूसरी ओर, वंदे मातरम बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित गीत है, जो स्वतंत्रता संग्राम से गहराई से जुड़ा हुआ है और भारतीय संस्कृति में गहरी जड़ें रखता है।
खन्ना के विचार भारतीय राष्ट्रवादी विचारधारा के साथ संरेखित दिखते हैं। उन्होंने अपने बयान में वंदे मातरम को भारतीय संस्कृति और परंपरा का अधिक प्रतीकात्मक प्रतिनिधि माना है। हालांकि, यह सुझाव राष्ट्रगान परिवर्तन की संभावना के बारे में वैचारिक विभाजन को दर्शाता है।
भारतीय राष्ट्रगान संविधान द्वारा संरक्षित है और इसका परिवर्तन एक जटिल प्रक्रिया होगी। विभिन्न विचारकों और राजनीतिक समूहों के बीच राष्ट्रगान के चयन को लेकर ऐतिहासिक असहमति रही है। वंदे मातरम को भारतीय संविधान में राष्ट्रगीत का दर्जा दिया गया है, लेकिन यह राष्ट्रगान नहीं है।