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नाना पाटेकर का निधन: अभिनेता से कारगिल के योद्धा तक का सफर
प्रसिद्ध अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की आयु में निधन हो गया। सिनेमा के साथ-साथ वह भारतीय प्रादेशिक सेना के सदस्य और कारगिल युद्ध के कमांडो भी रहे।
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नाना पाटेकर का जीवन सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं रहा। भारतीय सिनेमा के इस दिग्गज ने राष्ट्र सेवा के लिए भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। वह भारतीय प्रादेशिक सेना (टेरिटोरियल आर्मी) के सक्रिय सदस्य थे और कारगिल युद्ध में देश की सेवा की थी।
पटेकर ने कारगिल में अपनी कमांडो ड्यूटी के दौरान 60 दिन तक कठोर परिस्थितियों में काम किया। इस दौरान उन्होंने अपने करियर की परवाह किए बिना राष्ट्र सेवा में पूरी तरह समर्पित रहे। ऐसा बताया जाता है कि इस दुर्गम अभियान में उनका वजन 20 किलोग्राम तक कम हो गया था।
पटेकर की यह प्रतिबद्धता उन्हें एक आम फिल्म स्टार से अलग करती है। वह केवल सिनेमा तक सीमित नहीं रहे, बल्कि सैनिक जीवन के कठोर अनुशासन और त्याग को भी अपनाया। कारगिल में उनकी सेवा भारतीय रक्षा बलों के प्रति उनके गहरे समर्पण का प्रमाण थी।
अपने दीर्घ जीवन में नाना पटेकर ने फिल्म इंडस्ट्री में कई स्मरणीय भूमिकाएं निभाईं और साथ ही एक सैनिक के रूप में भी अपने कर्तव्य का निर्वहन किया। उनका निधन भारतीय सिनेमा और राष्ट्र सेवा दोनों के लिए एक बड़ी क्षति है।