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अडानी ₹37,500 करोड़ के कोयला गैसीकरण योजना में अग्रणी भूमिका निभा रहे
सरकार की महत्वाकांक्षी कोयला गैसीकरण योजना को पहले बोली चक्र में सात आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें चार परियोजनाएं यूरिया उत्पादन पर केंद्रित हैं जबकि शेष सिंगास और डीआरआई उत्पादन की ओर लक्षित हैं।
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भारत सरकार की राष्ट्रीय कोयला गैसीकरण योजना को पहले आवेदन चक्र में सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। योजना के तहत कुल सात परियोजनाओं के लिए आवेदन दाखिल किए गए हैं जिनमें अडानी समूह की महत्वपूर्ण भूमिका दिखाई दे रही है। यह पहल देश के खनिज संसाधनों का बेहतर उपयोग करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
कोयला गैसीकरण योजना का कुल आकार ₹37,500 करोड़ आंका गया है। सात परियोजनाओं में से चार यूरिया उत्पादन के लिए प्रस्तावित हैं, जो भारत की उर्वरक आवश्यकता को पूरा करने में मदद कर सकता है। शेष परियोजनाएं सिंथेसिस गैस और प्रत्यक्ष अपचयित लोहा (डीआरआई) जैसे मूल्यवान रासायनिक उत्पादों के उत्पादन पर केंद्रित हैं।
यह योजना कोयले को अधिक प्रभावी और मूल्य-संवर्धित उत्पादों में रूपांतरित करने का उद्देश्य रखती है। कोयला गैसीकरण तकनीक से न केवल स्थानीय कच्चे माल का सदुपयोग होगा बल्कि देश की आयात निर्भरता में भी कमी आएगी। इस प्रकार की परियोजनाएं भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए रणनीतिक महत्व रखती हैं।
उद्योग विशेषज्ञ इस योजना को राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता बढ़ाने का एक सार्थक प्रयास मानते हैं। कोयला गैसीकरण के माध्यम से उत्पादित उत्पादों की बाजार में व्यापक मांग है। सरकार के इस कदम से भारतीय उद्योगों को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिल सकता है।