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खाने और धार्मिक प्रथाओं की आजादी पर सुवेंदु अधिकारी का समर्थन
भारतीय जनता पार्टी के नेता सुवेंदु अधिकारी ने कहा है कि भारतीय संविधान नागरिकों को खान-पान और धार्मिक प्रथाओं को लेकर स्वतंत्रता प्रदान करता है। उन्होंने जोर दिया कि विभिन्न धर्मों के धर्मगुरुओं के विचार सुनने के बाद यह निर्णय लेना लोगों का अधिकार है।
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बंगाल के राजनीतिक नेता सुवेंदु अधिकारी ने धार्मिक स्वतंत्रता और खान-पान संबंधी व्यक्तिगत पसंद के मुद्दे पर एक मजबूत बयान दिया है। उन्होंने कहा कि संविधान के तहत भारत के प्रत्येक नागरिक को अपने धार्मिक विश्वास और जीवनशैली संबंधी निर्णय लेने की आजादी है।
अधिकारी के अनुसार विभिन्न धर्मों के धर्मगुरु और आध्यात्मिक नेता अपने-अपने समुदायों को मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि इन धार्मिक विचारों को स्वीकार करना या अस्वीकार करना पूरी तरह से व्यक्तिगत निर्णय है और यह प्रत्येक व्यक्ति का अधिकार है।
अधिकारी ने भारतीय संविधान के निर्माता डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की सराहना करते हुए कहा कि संविधान नागरिकों को इन मामलों में पूर्ण आजादी प्रदान करता है। उनके अनुसार, नागरिकों को यह चुनाव करने का अधिकार है कि वे किन धार्मिक और सांस्कृतिक प्रथाओं का पालन करना चाहते हैं।
यह बयान देश में धार्मिक आजादी और व्यक्तिगत पसंद के अधिकार को लेकर चल रही बहस के बीच दिया गया है।