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लक्कुंडी के छिपे हुए स्मारकों को खोजने के लिए लाइडार सर्वे शुरू
लक्कुंडी में पुरातात्विक महत्व के छिपे हुए ढांचों को खोजने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। 27 अगस्त को हस्ताक्षरित समझौते के तहत लाइडर सर्वे, जीआईएस मैपिंग और रिमोट सेंसिंग का इस्तेमाल होगा।
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कर्नाटक के ऐतिहासिक शहर लक्कुंडी में पुरातात्विक महत्व के छिपे हुए स्मारकों की खोज के लिए एक महत्वाकांक्षी परियोजना शुरू की गई है। इस परियोजना में लाइडर सर्वे, भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) मैपिंग, रिमोट सेंसिंग और ग्राउंड पेनेट्रेटिंग राडार (जीपीआर) जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।
27 अगस्त को हस्ताक्षरित समझौते के अनुसार, ये तकनीकें वनस्पति के घने आवरण के नीचे छिपी हुई ऐतिहासिक संरचनाओं को चिन्हित करने में मदद करेंगी। लाइडर तकनीक विशेष रूप से जंगल और वनस्पति वाले क्षेत्रों में पुरातात्विक साइटों की खोज के लिए प्रभावी साबित हुई है।
लक्कुंडी, जो मध्यकालीन भारत का एक महत्वपूर्ण व्यापारिक और सांस्कृतिक केंद्र था, के बारे में माना जाता है कि इसमें कई अचिन्हित स्मारक और ऐतिहासिक स्थल हो सकते हैं। इस सर्वे से क्षेत्र के समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के बारे में नई जानकारी सामने आने की संभावना है।
यह परियोजना भारतीय पुरातत्व विभाग के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जो डिजिटल तकनीकों का उपयोग करके अपनी खोज क्षमताओं को बढ़ा रहा है। इसके माध्यम से देश की छिपी हुई सांस्कृतिक धरोहर को प्रकाश में लाने का प्रयास किया जा रहा है।