LSN News › India

World · India Bureau

दस बार विफल: NEET परीक्षा छोड़ने वाले अभ्यर्थी की कहानी

एक अभ्यर्थी ने दस वर्षों में दस बार NEET परीक्षा में असफल होने के बाद आखिरकार चिकित्सा सेवा की तैयारी से हाथ खींच लिए। विशेषज्ञ भारत की प्रतियोगी परीक्षा संस्कृति के दीर्घकालीन प्रभावों पर चिंता व्यक्त कर रहे हैं।

LSN India · 29 September 2026

दस बार विफल: NEET परीक्षा छोड़ने वाले अभ्यर्थी की कहानी

एक दशक की निरंतर कोशिश के बाद भी एमबीबीएस की सीट हासिल न कर सकने वाला एक अभ्यर्थी अब चिकित्सा शिक्षा के सपने से विदा ले चुका है। यह मामला भारत की प्रतियोगी परीक्षा संस्कृति की गहराई से जुड़े सवालों को उठाता है।

जब इस अभ्यर्थी की कहानी सार्वजनिक हुई, तो सोशल मीडिया पर कई उपयोगकर्ताओं ने एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया। उन्होंने बताया कि यदि यह अभ्यर्थी दस वर्षों के बाद डॉक्टर बन भी जाता, तब तक वह चालीस वर्ष से अधिक की उम्र में होता। इसका अर्थ होता कि स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा और व्यावहारिक करियर की संभावनाएं सीमित रह जातीं।

यह घटना भारत में 'ड्रॉप कल्चर' या दीर्घकालीन तैयारी की प्रथा की ज्वलंत मिसाल है। हजारों छात्र साल दर साल राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में असफल होते रहते हैं, लेकिन अपने पेशेवर सपनों को पूरा करने के वैकल्पिक मार्ग नहीं अपनाते। विशेषज्ञ इस प्रवृत्ति को मानसिक स्वास्थ्य, समय प्रबंधन और शैक्षिक नीतियों से संबंधित एक गंभीर मुद्दा मानते हैं।

इस आंदोलन ने शिक्षा नीति-निर्माताओं से भी सवाल उठाए हैं कि क्या प्रवेश प्रक्रियाओं को अधिक समावेशी और प्रत्याशी-अनुकूल बनाया जा सकता है। साथ ही, इसने छात्रों को सलाह दी है कि सफलता का एक ही मार्ग नहीं होता, और सही समय पर विकल्प बदलना ही समझदारी हो सकता है।