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एल नीनो के कारण कृषि वैज्ञानिकों का धान खेती पर रोक लगाने का आह्वान
आने वाले महीनों में एल नीनो के गंभीर प्रभाव की आशंका से कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को धान की खेती से बचने का सुझाव दिया है। अगले साल की शुरुआत तक वर्षा के पैटर्न में कोई सुधार नहीं दिख रहा है।
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कृषि वैज्ञानिकों ने आगामी मौसम में एल नीनो के गंभीर असर को देखते हुए किसानों को धान की बुवाई से परहेज करने की सलाह दी है। वर्तमान मौसमी पूर्वानुमान से पता चलता है कि अगले कुछ महीनों और वर्ष की शुरुआत तक वर्षा में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं होने की संभावना है।
एल नीनो एक जलवायु घटना है जो प्रशांत महासागर में जल के तापमान में वृद्धि के कारण होती है। यह दक्षिण एशिया में सूखा और कम वर्षा का कारण बनती है, जिससे कृषि उत्पादन प्रभावित होता है। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि इस अवधि में धान की खेती जोखिम भरी हो सकती है क्योंकि फसलों को पर्याप्त जल नहीं मिल सकेगा।
विशेषज्ञों ने किसानों को वर्तमान परिस्थितियों में अन्य कम जल की आवश्यकता वाली फसलें उगाने का सुझाव दिया है। सरकारी कृषि विभाग मौसमी स्थितियों के बारे में किसानों को समय-समय पर सलाह प्रदान कर रहे हैं ताकि वे सूचित निर्णय ले सकें।
नीति निर्माता और कृषि अधिकारी किसानों के संभावित नुकसान को कम करने के लिए वैकल्पिक खेती के तरीकों पर काम कर रहे हैं। आने वाले महीनों में वर्षा पैटर्न की नियमित निगरानी की जाएगी ताकि कृषि समुदाय को आगामी चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहने में मदद मिल सके।