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2050 तक बिजली मांग पूरी कर सकती है कृषि-सौर ऊर्जा: जोशी
केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि उपयुक्त भूमि के मात्र 10 प्रतिशत हिस्से पर कृषि-सौर परियोजनाएं 2050 तक देश की संपूर्ण विद्युत मांग को पूरा कर सकती हैं। सरकार पीएम-कुसुम योजना के दूसरे चरण में कृषि-सौर ऊर्जा के लिए एक समर्पित घटक जोड़ने की तैयारी में है।
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प्रल्हाद जोशी ने भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कृषि-सौर तकनीक की क्षमता पर जोर दिया। इस तकनीक में सौर पैनल कृषि योग्य भूमि के ऊपर स्थापित किए जाते हैं, जिससे किसान नीचे की भूमि पर खेती जारी रख सकते हैं।
जोशी के अनुसार, यदि देश की उपयुक्त भूमि का मात्र दसवां हिस्सा कृषि-सौर परियोजनाओं के लिए उपयोग किया जाए, तो आने वाले दशकों में बढ़ती विद्युत मांग को संपूर्ण रूप से पूरा किया जा सकता है। यह दृष्टिकोण ऊर्जा सुरक्षा और कृषि समृद्धि दोनों को एक साथ आगे बढ़ाने का एक प्रभावी तरीका है।
इस लक्ष्य को साकार करने के लिए सरकार पीएम-कुसुम योजना के दूसरे चरण में कृषि-सौर ऊर्जा के लिए एक विशेष घटक शामिल करने का काम कर रही है। प्रधानमंत्री कुसुम योजना का उद्देश्य किसानों को सौर ऊर्जा अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना और उन्हें अतिरिक्त आय का स्रोत प्रदान करना है।
यह पहल भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को बढ़ाने और 2070 तक कार्बन तटस्थता हासिल करने के व्यापक उद्देश्य के अनुरूप है। कृषि-सौर तकनीक न केवल स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन सुनिश्चित करती है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत बनाती है।