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अहोई अष्टमी: माताओं के व्रत के लिए चांद निकलने का समय जानें

अहोई अष्टमी पर माताएं अपनी संतान की दीर्घायु के लिए व्रत रखती हैं। इस दिन चांद निकलने का सही समय और पारण विधि जानना महत्वपूर्ण है।

LSN India · 1 November 2026

अहोई अष्टमी: माताओं के व्रत के लिए चांद निकलने का समय जानें

अहोई अष्टमी का पर्व भारतीय परंपरा में माताओं के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र और कल्याण के लिए पूरे दिन व्रत रखती हैं। व्रत का पारण चांद को अर्घ्य देने के बाद ही किया जाता है। इसलिए चांद निकलने का सही समय जानना अत्यंत आवश्यक है।

2026 में अहोई अष्टमी पर चांद निकलने का समय क्षेत्र के अनुसार भिन्न हो सकता है। माताओं को सूर्यास्त के बाद आकाश की ओर ध्यान देते हुए चांद की प्रतीक्षा करनी चाहिए। तारों के दर्शन होने के बाद चांद निकलने की संभावना बढ़ जाती है। स्थानीय ज्योतिषीय गणना के अनुसार सटीक समय का पता लगाना चाहिए।

व्रत के दौरान घर की महिलाएं परिवार के आसपास एकत्रित होती हैं और चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरागत विधि का पालन करती हैं। अर्घ्य में दूध, जल और मेवे दिए जाते हैं। चांद को अर्घ्य देने के पश्चात् व्रत का पारण किया जाता है। इस विधि का पालन परिवार की समृद्धि और बच्चों के स्वास्थ्य के लिए माना जाता है।

अहोई अष्टमी का यह पारंपरिक उत्सव भारत के विभिन्न हिस्सों में समान उत्साह के साथ मनाया जाता है। माताओं की श्रद्धा और समर्पण इस पर्व की आत्मा है। सही समय पर व्रत का पारण करने से संतान के दीर्घ जीवन की कामना की जाती है।