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अहोई अष्टमी 1 नवंबर को, जानें पूजा मुहूर्त और व्रत विधि
इस बार अहोई अष्टमी का पावन व्रत 1 नवंबर को मनाया जाएगा। माताओं द्वारा अपनी संतानों की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए रखे जाने वाले इस व्रत का विस्तृत विवरण जानें।
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अहोई अष्टमी, कार्तिक महीने का एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जो इस वर्ष 1 नवंबर को मनाया जाएगा। यह पर्व मुख्य रूप से माताओं द्वारा मनाया जाता है जो अपनी संतानों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए व्रत रखती हैं। अहोई माता को समर्पित यह दिन हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है।
पूजा के लिए निर्धारित शुभ मुहूर्त के अनुसार माताएं सूर्यास्त से पहले पूजा की तैयारी करती हैं। व्रत को तारों के दर्शन के बाद ही खोला जाता है, जिससे पूजा की परंपरा पूरी मानी जाती है। चंद्रोदय का समय क्षेत्र अनुसार भिन्न हो सकता है, इसलिए स्थानीय समय जानना आवश्यक है।
अहोई अष्टमी की पूजा विधि में माता अष्टमी तिथि के दिन निर्जल या फलाहार व्रत रखती हैं। पारंपरिक पूजा में अहोई माता की मूर्ति या चित्र को स्थापित किया जाता है और दीप जलाए जाते हैं। व्रत कथा का पाठ करने की परंपरा भी इसी दिन निभाई जाती है जो मां की कृपा और आशीर्वाद पाने का माध्यम माना जाता है।