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अहोई अष्टमी व्रत: माता की पूजा की संपूर्ण विधि और शुभ समय

अहोई अष्टमी पर माताएं अपनी संतान की दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं। इस परंपरागत पर्व पर अहोई माता की पूजा करने की सही विधि और समय के बारे में जानकारी प्राप्त करें।

LSN India · 31 October 2026

अहोई अष्टमी व्रत: माता की पूजा की संपूर्ण विधि और शुभ समय

अहोई अष्टमी कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं अपनी संतान की कल्याण, स्वास्थ्य और दीर्घ जीवन की कामना के लिए व्रत रखती हैं। यह व्रत पारंपरिक रूप से भारतीय परिवारों में प्राचीन काल से चली आ रही परंपरा है।

अहोई अष्टमी की पूजा विधि में सर्वप्रथम व्रत रखने वाली महिला को प्रातःकाल स्नान कर पवित्र वस्त्र धारण करने चाहिए। घर में एक पवित्र स्थान पर अहोई माता की मूर्ति या चित्र स्थापित किया जाता है। फूल, दीप, धूप और घी का दीपक जलाकर पूजा की जाती है। व्रत रखने वाली महिलाएं पूरे दिन निर्जल रहती हैं और संतान की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करती हैं।

शाम के समय तारों को अर्घ्य देना इस व्रत का मुख्य हिस्सा है। जब आकाश में तारे दिखाई देने लगते हैं, तब महिलाएं चावल, गुड़ और जल से भरी कटोरी लेकर तारों को देखती हुई अर्घ्य प्रदान करती हैं। इसके बाद परिवार के सभी सदस्यों को प्रसाद वितरित किया जाता है और व्रत को तोड़ा जाता है।

पूजा के दौरान अहोई माता की महिमा का गायन भी किया जाता है। कई परिवारों में अहोई अष्टमी की कथा सुनने और सुनाने की भी परंपरा है। यह पूरी प्रक्रिया संतान की सुरक्षा और कल्याण की कामना से की जाती है।