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न्यायपालिका के विवेक की जगह नहीं ले सकता कृत्रिम बुद्धिमत्ता: CJI
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने कहा है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता न्यायिक तर्क को बेहतर बना सकती है, लेकिन न्यायाधीशों के विवेक की जगह नहीं ले सकती। उन्होंने इस तकनीक की देखरेख के लिए एक स्थायी शीर्ष निकाय स्थापित करने का प्रस्ताव दिया है।
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भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने बुधवार को जर्मनी के कार्लज़रूहे स्थित संघीय न्यायालय के अध्यक्ष उलरिक हर्मन के साथ द्विपक्षीय बैठक में कहा कि न्यायपालिका का मूल सिद्धांत यह है कि कृत्रिम बुद्धিमत्ता न्यायिक तर्क को तो सशक्त बना सकती है, लेकिन न्यायाधीशों के न्यायिक विवेक की जगह नहीं ले सकती।
CJI कांत के अनुसार, भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग कानूनी शोध, निर्णयों का 16 भाषाओं में अनुवाद और नागरिकों को मामले की स्थिति तथा प्रक्रियाओं की जानकारी देने के लिए संवादात्मक इंटरफेस जैसे विशिष्ट सहायक कार्यों में किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये उपकरण दोहराए जाने वाले कार्यों को कम करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, लेकिन ये न्यायिक परिणामों को निर्धारित नहीं करते।
सुप्रीम कोर्ट की कृत्रिम बुद्धिमत्ता समिति के मसौदा नियम प्रशासनिक उपयोग जैसे कार्यों की अनुमति देते हैं। CJI कांत ने इस नई तकनीक के अपनाने और जवाबदेही की निगरानी के लिए एक स्थायी शीर्ष निकाय स्थापित करने का प्रस्ताव दिया है। यह कदम न्यायपालिका में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए है।