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ओपनएआई और एंथ्रोपिक को धीरे बढ़ने की आजादी है: श्रीधर वेम्बु
चेन्नई स्थित सॉफ्टवेयर कंपनी ने तीन दशक पूरे करते हुए एआई-संचालित 'जिया चैट' लॉन्च किया है। कंपनी के संस्थापक का मानना है कि बड़ी एआई कंपनियों को विकास में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए।
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चेन्नई स्थित प्रमुख सॉफ्टवेयर कंपनी ने अपनी तीसरी दशाब्दी में प्रवेश करते हुए एक नई कृत्रिम बुद्धिमत्ता पहल की शुरुआत की है। कंपनी ने 'जिया चैट' नामक एक एआई-संचालित संवादात्मक इंटरफेस लॉन्च किया है, जो विभिन्न स्रोतों से सूचना, डेटा और कार्यप्रवाह को एकीकृत करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
कंपनी के संस्थापक श्रीधर वेम्बु ने कहा कि विश्व की शीर्ष एआई कंपनियों, विशेषकर ओपनएआई और एंथ्रोपिक, के पास अपने विकास को गति देने के लिए कोई बाहरी दबाव नहीं है। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रौद्योगिकी को जिम्मेदारीपूर्वक विकसित किया जाना चाहिए बजाय इसके कि बाजार की प्रतिस्पर्धा में तेजी आई जाए।
जिया चैट जैसे समाधान एंटरप्राइज ग्राहकों के लिए एआई तकनीक को अधिक सुलभ बनाने का प्रयास दर्शाते हैं। यह उपकरण विभिन्न डेटा स्रोतों को जोड़कर और कार्यप्रवाह को सुव्यवस्थित करके संगठनों को अधिक प्रभावी निर्णय लेने में मदद कर सकता है।
इंडस्ट्री विশेषज्ञ मानते हैं कि अगले वर्षों में एआई प्रौद्योगिकी को व्यावहारिक व्यावसायिक समाधानों में बदलने के लिए स्थानीय कंपनियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। भारतीय सॉफ्टवेयर क्षेत्र विश्व स्तरीय एआई अनुप्रयोग विकसित करने में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है।