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कर्मचारियों में बर्नआउट बढ़ रहा है, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से नौकरियों में कटौती की आशंका
एक नई सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय कंपनियों में 13 प्रतिशत कर्मचारी उच्च स्तर की मानसिक थकावट का सामना कर रहे हैं। आने वाले दो वर्षों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के कारण कार्यबल में 20 प्रतिशत तक कटौती की संभावना है।
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एक व्यापक सर्वेक्षण में चिंताजनक रुझान सामने आए हैं। कंपनियों के मानव संसाधन प्रमुखों की माने तो अगले दो सालों में कर्मचारियों की संख्या में महत्वपूर्ण कमी आ सकती है। लगभग 25 प्रतिशत सीएचआरओ (मुख्य मानव संसाधन अधिकारी) का अनुमान है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के कारण उनकी कंपनियों में 1 से 20 प्रतिशत तक कार्यबल में कमी आएगी।
कर्मचारियों के बीच मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का संकट और गहरा हो रहा है। वर्तमान में 13 प्रतिशत कर्मचारी अत्यधिक बर्नआउट की समस्या से जूझ रहे हैं, जो उनकी कार्यक्षमता और जीवन की गुणवत्ता दोनों को प्रभावित कर रहा है। यह प्रवृत्ति कई उद्योगों में देखी जा रही है।
तकनीकी परिवर्तन और नौकरी सुरक्षा को लेकर कर्मचारियों के बीच अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। कई संगठन अपने संचालन को स्वचालित करने के लिए एआई समाधान में निवेश कर रहे हैं, जिससे मानव कार्यबल की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। इस परिस्थिति में कर्मचारियों का नैतिक बल और भी गिर रहा है।
इंडस्ट्री विशेषज्ञों का मानना है कि संगठनों को अपने कर्मचारियों के लिए कौशल विकास कार्यक्रमों और मानसिक स्वास्थ्य सहायता पर ध्यान देने की तत्काल आवश्यकता है। इस संकट को संभालने के लिए स्पष्ट संचार और कर्मचारी-केंद्रित नीतियां बनाना अत्यंत महत्वपूर्ण है।