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कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास के लिए मजबूत बुनियादी ढांचा आवश्यक: अडानी
अडानी समूह के अध्यक्ष गौतम अडानी का मानना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के वास्तविक विकास के लिए मजबूत भौतिक बुनियादी ढांचे की जरूरत पड़ती है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक मूल्यांकन मॉडल के बजाय ऐसे तरीके अपनाने चाहिए जो पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के प्रभाव को समझें।
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अडानी समूह के अध्यक्ष गौतम अडानी ने इस बात पर जोर दिया है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) केवल एक सॉफ्टवेयर समाधान नहीं है, बल्कि इसके संचालन के लिए शक्तिशाली भौतिक बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि मौजूदा मूल्यांकन ढांचे प्रतिस्थापन संपत्तियों के लिए उपयुक्त हो सकते हैं, लेकिन बड़े पैमाने पर विकास और प्लेटफॉर्म बुनियादी ढांचे के मामले में ये अपर्याप्त साबित होते हैं।
अडानी के अनुसार, एआई और प्रौद्योगिकी क्षेत्र के विकास का मूल्यांकन करने के लिए ऐसे नए मॉडल की आवश्यकता है जो व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र के प्रभाव और गुणक मूल्य को समझ सकें। उनका मत है कि केवल प्रत्यक्ष लागत-लाभ विश्लेषण नहीं, बल्कि दीर्घकालीन आर्थिक वृद्धि और सामाजिक प्रभाव को भी ध्यान में रखना चाहिए।
यह बयान डिजिटल बुनियादी ढांचे में भारत के निवेश की बढ़ती महत्ता को रेखांकित करता है। देश में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की क्षमता को विकसित करने के लिए विद्युत, डेटा सेंटर, नेटवर्किंग और संबंधित प्रौद्योगिकी में महत्वपूर्ण निवेश की आवश्यकता है। अडानी का दृष्टिकोण इस बात को स्पष्ट करता है कि तकनीकी उन्नति और भौतिक बुनियादी ढांचे का विकास एक दूसरे के पूरक हैं।