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2030 तक कृत्रिम बुद्धिमत्ता से विनाशकारी खतरे की आशंका
विशेषज्ञों की एक सर्वेक्षण में पाया गया है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के खतरनाक क्षमताओं से आने वाले दशक में भारी नुकसान की संभावना 21.5 प्रतिशत है। साइबर हमलों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से सशस्त्र हथियारों का जोखिम भी लगभग इतना ही अधिक बताया जा रहा है।
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कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े खतरों पर किए गए एक व्यापक सर्वेक्षण में विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि आने वाले वर्षों में इस तकनीक से मानवता के लिए गंभीर जोखिम पैदा हो सकता है। सर्वेक्षण के अनुसार, 2030 तक कृत्रिम बुद्धिमत्ता द्वारा खतरनाक क्षमताएं हासिल करके विनाशकारी नुकसान पहुंचाने की संभावना 21.5 प्रतिशत आंकी गई है।
इसके अलावा, साइबर हमलों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता द्वारा संचालित हथियार प्रणालियों से उत्पन्न होने वाले खतरों की संभावना 21 प्रतिशत बताई गई है। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि विश्व भर के शोधकर्ता और नीति निर्माता इस तकनीक के गलत इस्तेमाल को लेकर कितने चिंतित हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता की तेजी से विकास हो रही क्षमताओं पर नियंत्रण के लिए तत्काल अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और मजबूत नियामक ढांचे की आवश्यकता है। इसके बिना, इस तकनीक का दुरुपयोग किया जा सकता है और वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
सर्वेक्षण में शामिल विशेषज्ञ समुदाय कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास में पारदर्शिता, सुरक्षा परीक्षण और अंतर्राष्ट्रीय निरीक्षण तंत्र की स्थापना की वकालत कर रहे हैं। वे मानते हैं कि सही नीति और तकनीकी उपायों के जरिए इन जोखिमों को कम किया जा सकता है।