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एयर चीफ मार्शल एपी सिंह का कार्यकाल: चुनौतियां, सुधार और विरासत
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह का तीन साल का कार्यकाल ऑपरेशन सिंदूर, स्वदेशी विमान तेजस को लेकर विवाद और लड़ाकू विमानों की कमी की गंभीर चेतावनियों से चिह्नित रहा है। वह 31 अक्टूबर को सेवानिवृत्त होंगे।
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भारतीय वायु सेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के कार्यकाल को राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य आधुनिकीकरण को लेकर उनके दृढ़ रुख से परिभाषित किया गया है। उनके नेतृत्व में वायु सेना ने ऑपरेशन सिंदूर जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को आगे बढ़ाया और सीमावर्ती क्षेत्रों में भारत की सुरक्षा क्षमता को मजबूत किया।
एयर चीफ मार्शल सिंह ने स्वदेशी रक्षा उत्पादन और तकनीकी क्षमता विकास पर विशेष बल दिया। तेजस विमान को लेकर उनकी नीति दृष्टिकोण भारत के आत्मनिर्भर रक्षा क्षेत्र के लक्ष्य के साथ संरेखित रही, हालांकि इसे कुछ मुद्दों के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा।
वायु सेना के समक्ष आने वाली सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक लड़ाकू विमानों की स्क्वॉड्रन संख्या में कमी है। एयर चीफ मार्शल सिंह ने इस मुद्दे को सार्वजनिक रूप से तुरंत समाधान की आवश्यकता वाली एक महत्वपूर्ण समस्या के रूप में उजागर किया। उन्होंने तीव्र गति से सैन्य खरीद और संयुक्त सेना संचालन की अवधारणा को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह का कार्यकाल भारतीय वायु सेना के भविष्य के लिए कई महत्वपूर्ण नीति और रणनीतिक दिशा निर्धारित करेगा। उनके बाद की कमान पिछले तीन वर्षों में स्थापित की गई नींव पर निर्माण करते हुए वायु सेना को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की जिम्मेदारी होगी।