Politics · India Bureau
शांति बंधपत्र पर हस्ताक्षर से इंकार करेंगी नेहा बोरा, असहमति पर लगाए गए प्रतिबंधों पर सवाल
अखिल भारतीय छात्र संघ की अध्यक्ष नेहा बोरा ने विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट के समक्ष 10,000 रुपये का व्यक्तिगत बंधपत्र पर हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने पुलिस के इस नोटिस को चुनौती देने की उनकी याचिका खारिज कर दी थी।
LSN India ·

नेहा बोरा ने शनिवार को सीपीआई(एमएल) लिबरेशन के संसदीय कार्यालय में पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि वह शांति बंधपत्र पर हस्ताक्षर नहीं करेंगी। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिरकार किसकी शांति के लिए उनसे यह बंधपत्र मांगा जा रहा है।
पुलिस ने 17 अक्टूबर को भारतीय न्याय संहिता की धारा 126 के तहत नोटिस जारी किया था। इस नोटिस में बोरा को 19 अक्टूबर को विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश होने के लिए कहा गया था। पुलिस ने उनसे यह बताने के लिए कहा कि वह 'जांच की अवधि के लिए शांति बनाए रखने' हेतु 10,000 रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र पर हस्ताक्षर क्यों न करें।
बोरा ने तर्क दिया कि सड़कों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन एक लोकतांत्रिक अधिकार है। उन्होंने सरकार से सवाल उठाने को सरकार के विरुद्ध खतरा बताए जाने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यदि नागरिक सरकार से प्रश्न नहीं उठाएंगे तो लोकतंत्र का अर्थ ही खत्म हो जाएगा।
इस कार्रवाई को असहमति पर लगाए गए प्रतिबंधों के नवीनतम उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। मामला विरोध के अधिकार और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन के प्रश्न को उजागर करता है।