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अखिलेश विधानसभा चुनाव से दूर रह सकते हैं, यह रणनीति UP में नई नहीं
उत्तर प्रदेश की राजनीति में विधानसभा चुनाव न लड़कर विधान परिषद या उपचुनाव के माध्यम से मुख्यमंत्री पद तक पहुंचने की रणनीति पुरानी परंपरा है। अखिलेश यादव सहित राज्य के कई प्रभावशाली नेता इसी मार्ग का अनुसरण कर सत्ता के शिखर पर पहुंचे हैं।
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उत्तर प्रदेश की राजनीति में विधानसभा चुनावों को सीधे न लड़ते हुए सर्वोच्च पद तक पहुंचने का तरीका कोई नया नहीं है। राज्य के शीर्ष नेताओं ने विधान परिषद के मार्ग अथवा उपचुनाव जीतकर मुख्यमंत्री का पद संभाला है।
राजनीति विश्लेषकों के अनुसार यह रणनीति राज्य के राजनीतिक इतिहास में बार-बार अपनाई गई है। अखिलेश यादव, मायावती और योगी आदित्यनाथ समेत कई दिग्गज नेताओं ने इसी प्रमाण में इस मार्ग को चुना है।
विधान परिषद के जरिए या फिर किसी सीट पर उपचुनाव जीतकर सदन में प्रवेश करने और फिर मुख्यमंत्री का पद संभालने की यह प्रक्रिया संवैधानिक दृष्टि से पूर्णतः वैध है। राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार नेता इस विकल्प को अपनाते आए हैं।
इस रणनीति का उपयोग तब होता है जब विधानसभा चुनाव में भाग लेना राजनीतिक रूप से जटिल हो या जब किसी नेता को विधान परिषद के माध्यम से प्रवेश करना अधिक व्यावहारिक प्रतीत हो। ऐसे में उपचुनाव या विधान परिषद सदस्य बनकर मुख्यमंत्री का पद ग्रहण किया जा सकता है।