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जावेद अख्तर का सवाल: क्या राजनीतिक रैलियों को भी इतना ही आक्रोश मिलता है?
प्रख्यात लेखक जावेद अख्तर ने चुनाव आयोग के विरोध प्रदर्शन की आलोचना करने वालों पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या राजनीतिक जनसभाओं को भी इतनी ही तीव्रता से विरोध का सामना करना पड़ता है।
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मुंबई - लेखक और पटकथा लेखक जावेद अख्तर ने चुनाव आयोग के विरुद्ध अभियान की आलोचना करने वाले नागरिकों के रुख पर सवाल उठाए हैं। अख्तर ने व्यंग्य के साथ कहा है कि जो लोग चुनाव प्रक्रिया से जुड़े विरोध प्रदर्शन की तीव्रता की आलोचना करते हैं, क्या वे राजनीतिक जनसभाओं और रैलियों के लिए भी समान मानदंड लागू करते हैं।
चुनाव आयोग के भीतर मतभेद होने के संबंध में एक समाचार रिपोर्ट के बाद इस मुद्दे को लेकर तनाव बढ़ा है। कुछ सक्रिय नागरिकों ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उजागर करने की योजना बनाई है और देशव्यापी आंदोलन की घोषणा की है।
अख्तर के बयान को राजनीतिक समीक्षकों द्वारा भारतीय लोकतांत्रिक प्रक्रिया में नागरिक सक्रियता की भूमिका के बारे में एक व्यापक सवाल के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने इस बात की ओर संकेत किया है कि किस तरह विभिन्न राजनीतिक गतिविधियों के प्रति समाज की प्रतिक्रिया में असमानता हो सकती है।