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शोर नियमों का पालन करे तो अज़ान में पुलिस हस्तक्षेप न करे: इलाहाबाद उच्च न्यायालय
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि मस्जिदें निर्धारित शोर मानदंडों का पालन करती हैं तो पुलिस और प्रशासन को अज़ान में बाधा डालने का कोई अधिकार नहीं है।
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इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश पुलिस को निर्देश दिया है कि वह मस्जिदों में अज़ान की घोषणा में हस्तक्षेप न करें, बशर्ते निर्धारित शोर नियमों का पालन किया जाए। न्यायालय ने अपने 2020 के फैसले में तय किए गए शोर मानदंडों का संदर्भ देते हुए कहा कि इन सीमाओं का अनुपालन किए जाने पर पुलिस और जिला प्रशासन के पास कोई हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि धार्मिक प्रथाओं के अभ्यास का अधिकार और पर्यावरणीय शोर नियंत्रण दोनों ही महत्वपूर्ण हैं। इसलिए मस्जिदें यदि पहले से निर्धारित ध्वनि स्तर की सीमा में रहकर अज़ान देती हैं तो कानून के दायरे में यह पूरी तरह से वैध है।
यह निर्देश उन घटनाओं के संदर्भ में दिया गया है जहां कुछ स्थानों पर पुलिस को मस्जिदों द्वारा अज़ान की घोषणा को लेकर शिकायतें मिली थीं। उच्च न्यायालय ने जोर देते हुए कहा कि इस तरह की शिकायतों की जांच करते समय पहले यह सुनिश्चित किया जाए कि क्या निर्धारित शोर स्तर का अतिक्रमण हुआ है।
न्यायालय का यह आदेश धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों के अनुरूप है और सभी धार्मिक समुदायों को समान सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से जारी किया गया है। इसके साथ ही न्यायालय ने पुलिस प्रशासन को सुझाव दिया है कि वह इस संबंध में सभी संबंधित पक्षों को स्पष्ट दिशानिर्देश प्रदान करें।