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ट्रांस महिला को BNS की धारा 69 में शामिल नहीं माना: इलाहाबाद HC
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने माना है कि लिंग पुनर्निर्धारण सर्जरी करवाने वाली ट्रांस महिला भारतीय न्याय संहिता की धारा 69 के तहत कानूनी परिभाषा में 'महिला' की श्रेणी में नहीं आती। यह धारा छल या विवाह का झूठा वचन देकर यौन संबंध के लिए दंड निर्धारित करती है।
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इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 69 के तहत 'महिला' की सांविधानिक परिभाषा में लिंग पुनर्निर्धारण सर्जरी के बाद ट्रांस महिलाएं शामिल नहीं मानी जाएंगी। न्यायालय की यह व्याख्या धारा 69 से संबंधित कानूनी प्रावधानों की समझ को परिभाषित करती है।
बीएनएस की धारा 69 छल, धोखाधड़ी या विवाह का झूठा वचन देकर किसी महिला से यौन संबंध बनाने वाले व्यक्ति को दंडित करती है, बशर्ते कि यह कृत्य बलात्कार की परिभाषा में न आता हो। यह प्रावधान महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तैयार किया गया था।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के इस निर्णय से ट्रांस महिलाओं के कानूनी अधिकारों से संबंधित मामलों में एक नई व्याख्या सामने आई है। न्यायालय ने माना है कि धारा 69 में 'महिला' शब्द का उपयोग करते समय विधायक की मूल मंशा जैविक महिलाओं तक सीमित थी।
यह निर्णय न्यायिक व्यवस्था में ट्रांस व्यक्तियों की कानूनी स्थिति संबंधी चल रहे विमर्श का हिस्सा है। मामले से जुड़े कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के फैसले ट्रांस समुदाय की सुरक्षा और अधिकारों के बारे में गहन विचार-विमर्श को जन्म दे सकते हैं।