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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 43 साल पुराने सामूहिक दुष्कर्म मामले में तीनों आरोपियों को बरी किया
फतेहपुर के चार दशक पुराने सामूहिक दुष्कर्म के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तीनों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है। अभियोजन पक्ष गवाहों के विरोधाभासी बयानों और अन्य महत्वपूर्ण सबूतों के अभाव में मजबूत केस साबित नहीं कर सका।
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इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सोमवार को फतेहपुर जिले के 43 साल पुराने सामूहिक दुष्कर्म के मामले में तीनों आरोपियों को बरी कर दिया है। न्यायालय के अनुसार, अभियोजन पक्ष ने आरोपियों के विरुद्ध आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त और सशक्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए।
कोर्ट ने अपने फैसले में गवाहों के बयानों में पाए गए महत्वपूर्ण विरोधाभासों की ओर ध्यान आकर्षित किया। न्यायमूर्तियों ने नोट किया कि मामले की जांच में देरी और FIR दर्ज करने में लगी कालावधि भी सबूतों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करते हैं।
इस निर्णय में अदालत ने कानूनी नियमों का पालन करते हुए कहा कि आरोपी को दोषी सिद्ध करने के लिए अभियोजन को "संदेह से परे" साक्ष्य प्रस्तुत करने होते हैं। चूंकि यह मानदंड पूरा नहीं हुआ, इसलिए आरोपियों को मुक्त करना अपरिहार्य था।
यह केस दशकों तक अदालत में लंबित रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय पुरानी पड़ी फाइलों में न्याय देने की प्रक्रिया और साक्ष्य संरक्षण की जिम्मेदारियों पर गंभीर सवाल उठाता है।