LSN News › India

Politics · India Bureau

'सर तन से जुदा' नारा कानून की सत्ता को चुनौती देता है: इलाहाबाद HC

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि विवादास्पद नारा महज धार्मिक अभिव्यक्ति नहीं है, बल्कि सशस्त्र विद्रोह के लिए लोगों को उकसाता है। अदालत ने इसे धार्मिक नारों जैसे 'जय श्री राम' के समान नहीं माना।

LSN India · 7 September 2026

'सर तन से जुदा' नारा कानून की सत्ता को चुनौती देता है: इलाहाबाद HC

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि 'सर तन से जुदा' नारा केवल धार्मिक विश्वास की अभिव्यक्ति नहीं है। अदालत के अनुसार, यह नारा लोगों को सशस्त्र विद्रोह के लिए उकसाता है और इसका धार्मिक नारों से कोई तुलना नहीं की जा सकती।

जस्टिस की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि 'सर तन से जुदा' नारे का चरित्र मौलिक रूप से भिन्न है। यह नारा राज्य की कानूनी सत्ता के विरुद्ध एक सीधी चुनौती प्रस्तुत करता है। अदालत ने इसे 'जय श्री राम' जैसे अन्य धार्मिक नारों से अलग बताया, जो धार्मिक विश्वास की अभिव्यक्ति तक सीमित हैं।

अदालत के इस फैसले का महत्व इस बात में निहित है कि यह भाषण की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच की सीमा रेखा को स्पष्ट करता है। न्यायालय ने माना कि जबकि धार्मिक अभिव्यक्ति को संरक्षण दिया जाता है, ऐसे नारे जो हिंसक विद्रोह को प्रोत्साहित करते हैं, कानून के दायरे में नहीं आते।

यह निर्णय देश में धर्म, भाषण की स्वतंत्रता और कानूनी व्यवस्था के बीच संतुलन की बहस में एक महत्वपूर्ण मिसाल बनेगा। अदालत का यह रुख यह दर्शाता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था को लेकर न्यायपालिका कितनी सजग है।