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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुस्लिम महिला से विवाह के बाद पिता द्वारा नजरबंद युवक को पेश करने का आदेश दिया
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने यूपी पुलिस को एक युवक को तुरंत पेश करने का आदेश दिया है, जिसे उसके पिता द्वारा नजरबंद रखा जा रहा है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि आयुष मलिक ने स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन किया था और पुलिस पिता के साथ मिलकर काम कर रही है।
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इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक हबियस कॉर्पस याचिका पर सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस को आयुष मलिक को तुरंत पेश करने का आदेश दिया है। याचिका में कहा गया है कि मलिक को उसके पिता द्वारा अवैध रूप से नजरबंद रखा जा रहा है।
याचिकाकर्ता के अनुसार, आयुष मलिक ने स्वेच्छा से हिंदू धर्म त्याग कर इस्लाम धर्म अपनाया और चांदनी कुरैशी से विवाह किया। याचिका में यह दावा किया गया है कि यह परिवर्तन किसी प्रकार के दबाव या जबरदस्ती के बिना हुआ था।
याचिका में आगे आरोप लगाया गया है कि राज्य के अधिकारी आयुष के पिता के साथ मिलकर काम कर रहे हैं और इस अवैध नजरबंदी में सहयोग प्रदान कर रहे हैं। इस संदर्भ में अदालत का हस्तक्षेप एक संवेदनशील मामले का संकेत देता है जिसमें धार्मिक रूपांतरण और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मुद्दे शामिल हैं।
अदालत का यह आदेश संवैधानिक अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता के प्रश्न पर एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।