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जमीन अधिग्रहण में निजी मालिकों को बिक्री विलेख पर हस्ताक्षर के लिए बाध्य नहीं कर सकती सरकार: इलाहाबाद उच्च न्यायालय

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि स्वैच्छिक बिक्री और अनिवार्य भूमि अधिग्रहण दो अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाएं हैं। न्यायालय ने प्राधिकारियों को याचिकाकर्ताओं को परेशान करने या जबरदस्ती सहमति प्राप्त करने से रोकने का निर्देश दिया है।

LSN India · 23 August 2026

जमीन अधिग्रहण में निजी मालिकों को बिक्री विलेख पर हस्ताक्षर के लिए बाध्य नहीं कर सकती सरकार: इलाहाबाद उच्च न्यायालय

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि सरकारी अधिकारी निजी जमीन के मालिकों को बिक्री विलेख पर हस्ताक्षर के लिए बाध्य नहीं कर सकते। न्यायालय के अनुसार, भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में स्वैच्छिक बिक्री और अनिवार्य अधिग्रहण दोनों को अलग-अलग कानूनी प्रक्रिया के रूप में माना जाना चाहिए।

इस मामले में न्यायालय ने प्रशासनिक अधिकारियों को याचिकाकर्ताओं के साथ किसी भी प्रकार का उत्पीड़न या दबाव डालने से रोकने का सीधा निर्देश दिया है। अदालत का मानना है कि जब तक कोई व्यक्ति स्वेच्छा से अपनी जमीन बेचने के लिए सहमत न हो, तब तक प्राधिकारियों को इस संबंध में कोई कदम नहीं उठाने चाहिए।

न्यायालय के इस निर्णय से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में व्यक्तिगत अधिकारों की सुरक्षा को लेकर एक स्पष्ट दिशा-निर्देश मिलता है। यह फैसला उन सभी मामलों में महत्वपूर्ण है जहां सरकार विकास परियोजनाओं के लिए निजी जमीन अधिग्रहण करना चाहती है।

इसके साथ ही अदालत ने यह भी कहा है कि यदि किसी भूमि मालिक को उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है, तो वह न्यायिक हस्तक्षेप की मांग कर सकता है। यह निर्णय भूमि अधिग्रहण कानून की व्याख्या में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।