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अहोई अष्टमी: जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और खगोलीय घटनाओं का समय
अहोई अष्टमी के दिन पूजा का शुभ समय दोपहर 5 बजकर 36 मिनट से शुरू होगा। तारे और चंद्रमा के निकलने का विशिष्ट समय जानें।
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1 नवंबर को मनाई जाने वाली अहोई अष्टमी पर भक्तों के लिए पूजा-अर्चना का सर्वोत्तम समय संध्या 5 बजकर 36 मिनट से लेकर 6 बजकर 54 मिनट तक रहेगा। यह समय देश भर के अधिकांश हिस्सों में पूजा संपन्न करने के लिए अनुकूल माना जा रहा है।
खगोलीय दृष्टिकोण से, सूर्यास्त के पश्चात संध्या 6 बजे तारे दिखाई देने लगेंगे। इस शुभ पल को परंपरागत रूप से व्रत खोलने और प्रसाद वितरण के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
चंद्रोदय की घटना रात 11 बजकर 40 मिनट पर होगी। अहोई अष्टमी का यह व्रत प्रमुखतः माताओं द्वारा अपने संतानों की लंबी उम्र और कल्याण के लिए रखा जाता है। सूर्यास्त के बाद तारे निकलने तक का समय परिवार के साथ पूजा-पाठ को संपन्न करने के लिए उपयुक्त माना गया है।