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अमेजन इंजीनियर ने 46 लाख के पैकेज को ठुकराकर सेना में अफसर बनने का रास्ता चुना
लखनऊ के शार्देंदु तिवारी ने बहुराष्ट्रीय कंपनी में आकर्षक वेतन का प्रस्ताव छोड़कर राष्ट्र सेवा का मार्ग अपनाया है। पिता के सैन्य सेवा के पदचिन्हों पर चलते हुए वे भारतीय सेना में अफसर के रूप में कार्यरत हुए हैं।
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कॉर्पोरेट जगत की चकाचौंध भरी दुनिया से मुंह मोड़कर राष्ट्र सेवा का रास्ता चुनना आसान नहीं होता। लेकिन उत्तर प्रदेश के लखनऊ निवासी शार्देंदु तिवारी ने इस कठिन निर्णय को साकार बनाया है। अमेजन जैसी प्रतिष्ठित तकनीकी कंपनी में उच्च पद पर नियुक्त तिवारी ने 46 लाख रुपये के वार्षिक पैकेज को अस्वीकार करके भारतीय सेना में अफसर के पद को स्वीकार किया।
तिवारी के इस निर्णय के पीछे पारिवारिक संस्कार और सेवा की भावना निहित है। अपने पिता की सैन्य सेवा से जुड़ी विरासत को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने ऑलिव ग्रीन वर्दी धारण की है। उनका कदम उन युवा पेशेवरों के लिए प्रेरणादायक साबित हो सकता है जो भौतिक सुविधाओं के बीच अपने कर्तव्य और देशभक्ति को भूल जाते हैं।
तिवारी जैसे प्रतिभाशाली युवाओं का सेना में आना भारतीय सशस्त्र बलों की मजबूती में महत्वपूर्ण योगदान साबित हो सकता है। उच्च तकनीकी योग्यता और कॉर्पोरेट अनुभव से लैस अफसर सेना के आधुनिकीकरण और संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यह उदाहरण इस बात को रेखांकित करता है कि जब देश सेवा का जुनून प्रबल हो, तो व्यक्तिगत लाभ गौण हो जाता है।