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अम्बेडकर ने धर्म परिवर्तन क्यों किया: मृत्यु से 53 दिन पहले बौद्ध धर्म अपनाया
डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर ने अपने जीवन के अंतिम दिनों में हिंदू धर्म त्याग कर बौद्ध धर्म स्वीकार किया। यह निर्णय उनके सामाजिक और धार्मिक विचारों का प्रतिफलन था।
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भारतीय संविधान के मुख्य वास्तुकार डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर का धर्म परिवर्तन भारतीय इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक आंदोलनों में से एक माना जाता है। 1956 में अपनी मृत्यु से मात्र 53 दिन पहले, अम्बेडकर ने हजारों अनुयायियों के साथ नागपुर में बौद्ध धर्म अपनाया। यह कार्यक्रम दलित समुदाय के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हुआ।
अम्बेडकर का धर्म परिवर्तन उनके दशकों लंबे संघर्ष का परिणाम था। उन्होंने हिंदू समाज में व्याप्त जाति प्रणाली और भेदभाव के खिलाफ लंबे समय से आवाज उठाई थी। बौद्ध धर्म को अपनाने का निर्णय समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व के मूल्यों पर आधारित था, जो अम्बेडकर के वैचारिक दर्शन के मूल में थे।
अम्बेडकर के धर्म परिवर्तन का भारतीय समाज पर गहरा प्रभाव पड़ा। लाखों दलितों ने उनके इस कदम का अनुसरण किया और बौद्ध धर्म में परिवर्तित हुए। यह आंदोलन सामाजिक न्याय और समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है। अम्बेडकर का यह निर्णय उनके जीवन भर के संघर्ष और विचारों की व्यावहारिक अभिव्यक्ति था।
आज भी अम्बेडकर का धर्म परिवर्तन दलित आंदोलन का एक प्रेरणादायक पहलू बना हुआ है। नागपुर में उनके द्वारा किए गए धर्म परिवर्तन समारोह को सामाजिक परिवर्तन के एक महत्वपूर्ण प्रतीक के रूप में याद किया जाता है।