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प्राचीन मिस्र में राजाओं के साथ दास दफनाए जाते थे: पुरातत्व अध्ययन
प्राचीन मिस्र की सभ्यता से जुड़े नए पुरातात्विक साक्ष्य एक भयावह परंपरा को उजागर कर रहे हैं। हजारों वर्ष पहले राजकीय दफनों में सेवकों को भी जीवित अवस्था में दफनाया जाता था।
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प्राचीन मिस्र की सभ्यता से जुड़े नए अध्ययन एक ऐसी कठोर परंपरा के साक्ष्य सामने ला रहे हैं, जिसके बारे में सुनकर आधुनिक मानवता आश्चर्यचकित रह जाती है। पुरातत्वविदों द्वारा की गई खुदाई में पता चला है कि राजा और महाराजाओं के दफन स्थलों पर उनके सेवकों को जीवित अवस्था में ही मिट्टी में दफनाया जाता था। यह परंपरा मिस्र के शासकों की आध्यात्मिक मान्यताओं और परलोक की अवधारणा से जुड़ी थी।
शोधकर्ताओं का मानना है कि प्राचीन मिस्र की संस्कृति में यह विश्वास था कि राजा परलोक में भी उसी तरह शक्तिशाली रहेंगे जैसे धरती पर थे। इसी कारण उनके दरबार के सदस्यों और सेवकों को भी उनके साथ दफनाया जाता था। पिरामिडों और राजकीय कब्रों से मिले साक्ष्य इस खौफनाक रीति-रिवाज की पुष्टि करते हैं।
हजारों वर्ष पहले प्रचलित इस परंपरा को आज की मानवीय सभ्यता के मापदंड से देखना न्यायसंगत नहीं हो सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह परंपरा उस समय की धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं का प्रतिफलन थी। प्राचीन मिस्र की खोज से पता चलता है कि विभिन्न सभ्यताओं में राजकीय कर्मकांड और दफन प्रथाएं कितनी विविध और जटिल थीं।