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झारखंड के प्राचीन मंदिर में हाथियों को समर्पित है अद्भुत पूजा परंपरा

पूर्वी सिंहभूम जिले में स्थित 'हाथी खेदा ठाकुर मंदिर' तीन सौ वर्षों से अपनी विशिष्ट परंपरा को संरक्षित रखे हुए है। यह मंदिर देवी-देवताओं के बजाय मिट्टी के हाथियों की पूजा के लिए जाना जाता है।

LSN India · 23 September 2026

झारखंड के प्राचीन मंदिर में हाथियों को समर्पित है अद्भुत पूजा परंपरा

झारखंड के पूर्वी सिंहभूम क्षेत्र में 'हाथी खेदा ठाकुर मंदिर' भारतीय धार्मिक परंपराओं की विविधता का एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करता है। यह मंदिर न केवल अपनी प्राचीन संरचना के लिए बल्कि अपनी असामान्य पूजा पद्धति के लिए भी उल्लेखनीय है, जहां तीन शताब्दियों से अधिक समय से मिट्टी के हाथियों को पवित्र माना जाता है।

स्थानीय परंपरा के अनुसार, इस मंदिर में प्रचलित हाथी पूजन की प्रथा क्षेत्र की प्राचीन मान्यताओं और संस्कृति से जुड़ी हुई है। मिट्टी के इन हाथी मूर्तियों को न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है, बल्कि स्थानीय समुदाय इन्हें अपनी सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक भी मानता है।

यह मंदिर उन दुर्लभ धार्मिक स्थलों में से एक है जहां पारंपरिक पूजा विधान से हटकर एक विशिष्ट देवता के प्रति समर्पण देखने को मिलता है। क्षेत्र के विद्वान और इतिहासकार इस परंपरा को क्षेत्रीय लोक धर्म और प्रकृति से जुड़ी आस्था का जीवंत प्रमाण मानते हैं।

आज भी भक्त और पर्यटक इस मंदिर की अनोखी परंपरा को समझने के लिए दूर-दूर से आते हैं। इस मंदिर का अस्तित्व भारतीय धर्म की लचीली प्रकृति और विविध सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों को दर्शाता है।