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19 अगस्त से शुरू होगा कुट्टियट्टम महोत्सव
केरल की प्राचीन नाट्य परंपरा कुट्टियट्टम के वार्षिक महोत्सव का आयोजन आने वाले सप्ताह में होने वाला है। यह आयोजन भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
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कुट्टियट्टम, जो संस्कृत नाटकों की एक अद्वितीय प्रस्तुति शैली है, का वार्षिक महोत्सव 19 अगस्त से शुरू होगा। यह परंपरागत कला रूप केरल में मंदिरों में सदियों से प्रदर्शित किया जाता रहा है और यह दक्षिण भारतीय सांस्कृतिक परंपरा का एक महत्वपूर्ण अंग है।
यूनेस्को द्वारा मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के रूप में मान्यता प्राप्त कुट्टियट्टम को इसकी जटिल अभिनय शैली, परिष्कृत मुखौटों और परिधानों के लिए जाना जाता है। इस महोत्सव का आयोजन इस प्राचीन कला को जीवंत रखने और नई पीढ़ी को इससे परिचित कराने के उद्देश्य से किया जाता है।
कुट्टियट्टम के प्रदर्शन में नर्तकियों को वर्षों की कठोर प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है। इसमें अत्यंत विशिष्ट हाथ के इशारे, चेहरे की गतिविधियां और शारीरिक मुद्राएं शामिल होती हैं जो कथा को जीवंत करती हैं।
यह महोत्सव केरल की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने और भारतीय नाट्य परंपरा के विविध रूपों को संरक्षित करने का एक महत्वपूर्ण मंच बन गया है।