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बुद्धि को पात्र नहीं, अग्नि मानना चाहिए: प्लूटार्क

प्राचीन यूनानी दार्शनिक प्लूटार्क का एक प्रसिद्ध विचार शिक्षा और मानसिक विकास के बारे में नई बहस को जन्म दे रहा है। उनके अनुसार मन को ज्ञान से भरने के बजाय उसे जागृत और प्रज्वलित करना चाहिए।

LSN India · 27 August 2026

बुद्धि को पात्र नहीं, अग्नि मानना चाहिए: प्लूटार्क

प्राचीन यूनानी दार्शनिक प्लूटार्क का एक कालजयी विचार आधुनिक शिक्षा व्यवस्था पर महत्वपूर्ण प्रश्न उठा रहा है। प्लूटार्क के अनुसार, मन एक पात्र नहीं है जिसे सरलतापूर्वक तथ्यों और ज्ञान से भर दिया जाए। बल्कि यह एक अग्नि है जिसे प्रज्वलित और जागृत करने की आवश्यकता है।

यह विचार तकनीकी युग में शिक्षा की परिभाषा पर पुनर्विचार करने का आह्वान करता है। पारंपरिक शिक्षा पद्धति अक्सर विद्यार्थियों के मस्तिष्क को सूचना से भरने पर केंद्रित रहती है। हालांकि, प्लूटार्क का दृष्टिकोण आलोचनात्मक सोच, जिज्ञासा और रचनात्मक क्षमता विकसित करने पर बल देता है।

शिक्षकों और शैक्षणिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस दर्शन को आधुनिक पाठ्यक्रम में शामिल करना चाहिए। यह दृष्टिकोण छात्रों को न केवल ज्ञान प्रदान करता है, बल्कि उन्हें स्वतंत्र चिंतक और समस्या समाधानकर्ता बनने के लिए प्रोत्साहित करता है।

प्लूटार्क का यह कालजयी विचार आज के प्रतिযोगितामूलक समाज में अधिक प्रासंगिक हो गया है, जहां रचनात्मकता और नवाचार सफलता की कुंजी माने जाते हैं।