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अंडमान-निकोबार में डेटा सेंटर: प्रशासन की रुचि फिर वापसी
ग्रेट निकोबार द्वीप पर केंद्र सरकार की 91,000 करोड़ रुपये की महाबुनियादी ढांचा परियोजना के खिलाफ स्थानीय निकोबारी समुदाय विरोध कर रहे हैं। इस परियोजना में हवाई अड्डा, ट्रांससिपमेंट पोर्ट और पर्यटन-केंद्रित नगर निर्माण शामिल है।
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अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के डेटा सेंटर विकास प्रस्ताव को लेकर केंद्रीय प्रशासन का रुख अस्पष्ट बना हुआ है। शुरुआती रुचि दिखाने के बाद अब प्रशासन ने इस योजना से किनारा कर लिया है।
यह विकास योजना ग्रेट निकोबार द्वीप पर सरकार की बड़ी परियोजना का हिस्सा है जिसमें नए हवाई अड्डे, समुद्री बंदरगाह और पर्यटन-आधारित शहर विकास की परिकल्पना है। इस परियोजना पर कुल 91,000 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है।
स्थानीय निकोबारी समुदाय इस विशाल अवसंरचना परियोजना के विरोध में मुखर हो गया है। समुदाय के सदस्यों का मानना है कि यह परियोजना उनकी पारंपरिक जीवनशैली और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाएगी।
डेटा सेंटर विकास योजना को लेकर स्पष्ट नीति का अभाव राहत और चिंता दोनों का विषय बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि द्वीप के संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र और स्थानीय समुदायों की सहमति किसी भी बड़ी परियोजना के लिए महत्वपूर्ण है।