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आंध्र प्रदेश में बाढ़ का खतरा: स्वास्थ्य सुरक्षा के अहम उपाय
आंध्र प्रदेश में बाढ़ की स्थिति में जलभराव से होने वाले संक्रमण और स्वास्थ्य जोखिमों से बचाव के लिए विशेषज्ञ सावधानियां बरतने की सलाह दे रहे हैं।
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बाढ़ के दौरान जलभराव में सीवेज, बैक्टीरिया, रासायनिक पदार्थ, तीखे मलबे और पशु अपशिष्ट का मिश्रण होता है, जो गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा करते हैं। इस प्रकार का दूषित जल त्वचा संक्रमण, पेट की बीमारियों और घाव के संक्रमण का मुख्य कारण बनता है। विशेषज्ञों के अनुसार बाढ़ से प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं में तेजी आती है।
बाढ़ के समय दूषित जल के संपर्क में आने से बचना सर्वोत्तम बचाव उपाय है। प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सलाह दी जाती है कि बाढ़ के पानी में न उतरें और न ही पीएं। यदि शरीर का कोई हिस्सा बाढ़ के पानी के संपर्क में आए तो तुरंत साफ पानी और साबुन से धोना चाहिए। खुली चोटों और घावों को विशेष सावधानी से ढंकना जरूरी है।
पेयजल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उबले हुए या क्लोरीन से उपचारित पानी का ही सेवन करना चाहिए। बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखते हुए नियमित रूप से हाथ धोना और स्वच्छ भोजन करना अनिवार्य है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इन सरल सावधानियों को अपनाकर बाढ़ जनित बीमारियों के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।