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आंध्र प्रदेश के किसान जलवायु संकट और आर्थिक दबाव के बीच फंसे
बापटला के सूखाग्रस्त क्षेत्रों से लेकर कृष्णा डेल्टा के डीजल पंपों और पश्चिम गोदावरी के सड़ते हुए धान के खेतों तक, आंध्र प्रदेश के किसान जलवायु संकट के विभिन्न रूपों का सामना कर रहे हैं।
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आंध्र प्रदेश के कृषि क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव अलग-अलग भौगोलिक इलाकों में भिन्न रूपों में सामने आ रहे हैं। बापटला जिले में किसान सूखे और पानी की कमी से जूझ रहे हैं, जबकि कृष्णा डेल्टा क्षेत्र में डीजल चालित पंपों पर बढ़ती निर्भरता के कारण उत्पादन लागत में वृद्धि हो रही है।
पश्चिम गोदावरी जिले में स्थिति और भी गंभीर है, जहां किसानों के धान के खेतों में सड़न की समस्या देखी जा रही है। अनियमित वर्षा और तापमान में उतार-चढ़ाव से फसल को नुकसान पहुंच रहा है, जिससे किसानों की आय में गिरावट आ रही है।
यह संकट केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में किसान अलग-अलग तरीकों से जलवायु संकट का सामना कर रहे हैं। सूखा, बाढ़, फसल की बीमारी और बढ़ती कृषि लागत ने किसानों को वित्तीय दबाव में डाल दिया है।
आंध्र प्रदेश के कृषि क्षेत्र के लिए यह स्थिति चिंताजनक है। जलवायु परिवर्तन के अनुकूल खेती की रणनीति और आर्थिक सहायता के बिना किसानों के सामने आने वाले दिन और भी कठिन हो सकते हैं।