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मानव बाल उद्योग के संकट को दूर करने के लिए केंद्र से आग्रह
आंध्र प्रदेश चैंबर्स ऑफ कॉमर्स ने सरकार से तत्काल नीति हस्तक्षेप की मांग की है। संगठन का कहना है कि अनियंत्रित कच्चे माल के निर्यात से पिछले सात-आठ साल से इस क्षेत्र पर गंभीर दबाव बना हुआ है।
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भारत के मानव बाल उद्योग को बचाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर नीतिगत सुधार की जरूरत है, यह मांग आंध्र प्रदेश चैंबर्स ऑफ कॉमर्स और इंडस्ट्री की ओर से उठाई गई है। चैंबर्स के अनुसार, देश से कच्चे मानव बाल का अनियंत्रित निर्यात इस महत्वपूर्ण क्षेत्र के लिए एक प्रमुख समस्या बन गया है जिसने हजारों कारीगरों और व्यावसायिकों को प्रभावित किया है।
उद्योग जगत के इस संगठन के अनुसार, पिछले सात से आठ वर्षों में लगातार कच्चे माल के निर्यात के कारण घरेलू बाल प्रसंस्करण उद्योग को गंभीर संकट का सामना करना पड़ रहा है। पर्याप्त नियामक सुरक्षा के अभाव में यह स्थिति और भी चिंताजनक हो गई है, जिसके कारण स्थानीय निर्माता अंतर्राष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा नहीं कर पा रहे हैं।
चैंबर्स का मानना है कि इस समस्या का समाधान केंद्र सरकार के माध्यम से ही संभव है। संगठन ने आयात-निर्यात नीति में सुधार और कच्चे माल के नियंत्रित प्रबंधन के लिए एक व्यापक ढांचा तैयार करने की अपील की है। यह कदम न केवल घरेलू उद्योग को मजबूत करेगा, बल्कि देश के आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तत्काल सुधारात्मक उपाय नहीं किए गए, तो इस परंपरागत उद्योग का अस्तित्व ही खतरे में पड़ सकता है। सरकार से अपेक्षा की जा रही है कि वह इस क्षेत्र की विशिष्ट समस्याओं को समझते हुए एक सुदृढ़ नीतिगत रूपरेखा तैयार करे।