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आंध्र प्रदेश का गांव हुआ जनशून्य, सूखे ने बदल दी तकदीर
आंध्र प्रदेश के गट्टुमीडापल्ले गांव में जल संकट के कारण लगातार फसलें बर्बाद हो रही हैं। मूंगफली की खेती से जुड़े किसान परिवार रोजगार की तलाश में अन्य इलाकों को पलायन कर गए हैं।
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आंध्र प्रदेश का गट्टुमीडापल्ले गांव कभी मूंगफली उत्पादन का एक समृद्ध केंद्र था। यहां के खेत हरे-भरे रहते थे और किसान परिवार खेती से अपना जीवनयापन करते थे। लेकिन पानी की कमी की समस्या ने इस गांव की तस्वीर ही बदल दी है।
बारंबार फसल की विफलता ने स्थानीय किसानों को अपनी आजीविका के वैकल्पिक साधन तलाशने के लिए मजबूर किया है। जल संकट से जूझते हुए कृषि में निवेश करना असंभव साबित हुआ है। नतीजतन, परिवारों के परिवारों को अपने गांव छोड़कर दूसरे इलाकों में जाना पड़ा है।
यह गांव अब एक उजड़े हुए स्थान में तब्दील हो गया है, जहां घर खाली पड़े हैं और खेत परती रह गई हैं। पलायन की इस लहर ने गांव की जनसंख्या को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। स्थानीय अर्थव्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई है।
गट्टुमीडापल्ले की दास्तान दक्षिण भारत के कई अन्य कृषि क्षेत्रों में भूजल संकट और सूखे की समस्या की गंभीरता को दर्शाती है। जल संचयन और कृषि नीतियों में सुधार के बिना ऐसे गांवों का पुनरुद्धार संभव नहीं लगता।