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वाशिंगटन विश्वविद्यालय में नवजात बंदरों पर क्रूर प्रयोग का खुलासा
पेटा ने चिंताजनक वीडियो साक्ष्य जारी किए हैं जो दर्शाते हैं कि अमेरिका के वाशिंगटन विश्वविद्यालय में शिशु मकाक बंदरों पर तंत्रिका संबंधी परीक्षण किए जा रहे हैं। ये प्रयोग नवजातों को उनकी माताओं से जबरदस्ती अलग करके किए जाते हैं।
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पशु अधिकार संगठन पेटा द्वारा जारी किए गए सबूतों में वाशिंगटन विश्वविद्यालय में शिशु मकाक बंदरों पर किए जा रहे कठोर प्रयोगों का चौंकाने वाला विवरण सामने आया है। इन प्रयोगों में मात्र दो दिन के नवजात बंदरों को उनकी माताओं से अलग किया जाता है और उन्हें न्यूरोटॉक्सिन के प्रभाव अध्ययन के लिए परीक्षित किया जाता है।
पेटा के खुलासों के अनुसार, इन संवेदनशील शिशु प्राइमेट्स में से अधिकांश परीक्षण पूर्ण होने के बाद मार दिए गए। संगठन का कहना है कि यह प्रक्रिया प्राणियों के विकास पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव डालती है और नैतिक मानकों का खुला उल्लंघन है।
वैज्ञानिक समुदाय के विशेषज्ञों ने इस तरह के प्रयोगों की कड़ी निंदा की है। वे इन परीक्षणों को न केवल क्रूर बल्कि विज्ञान के नैतिक सिद्धांतों के विरुद्ध भी मानते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, माता-बच्चे के बीच अलगाव बंदरों के मनोवैज्ञानिक और शारीरिक विकास को गंभीर रूप से प्रभावित करता है।
यह प्रकरण प्राणी परीक्षण के नियमन और पर्यवेक्षण को लेकर व्यापक बहस को जन्म देने की संभावना रखता है। पेटा ने विश्वविद्यालय पर इस तरह के अनुसंधान को तुरंत बंद करने का आह्वान किया है।